पार्थिव पूजनं – भजन स्वरचित

संवारलौं सबके शिव शंकरसुख संपति सुहनमां ।
बेर हमर आयल जं भोला
मुनलौं आंखि धियनमां ॥
भरलौं झोली सब के तॅ अहां
औढरदानी कहनमां।
पापी एक टा हमही भारी
मुनलौं आंखि धियनमां ॥
रूसल छी किये दानी दिगम्बर
गौरा के सजनमां ।
पूजा करब जे आवू कनियें
बसहा के चढनमां ॥
मंत्र कॅ ज्ञान न विधि-विधान तॅ
फेरब अहां जे मुंहमां।
ताकथिन के फेर मूर्ख-जपाल के
रखथिन अपन शरणमां ॥

स्वर :~ मुझे तेरी ……

बाबा यौ कतय गेलियैअहां हमरा विसैर गेलियै।
कोना बचवै रोना रोवै
विलख कॅ हम पछैर गेलियै ॥सुनू भोलेनाथ विनती हमरन मुंह फेरु हमर दिस सं
दुनू कर जोड़ी गावै छी
अहां कॅ हम बुलावै छी
चैल आउ बसहा चढल
भवानी संग विलैट गेलियै॥ कोना बचवै ….जे अयलौं न यदि मंदिरचढैलौं न अहां कॅ नीर
सुनाय पयलौं न वेद यदि
न गाय पयलौं नचारी कभी
किये अहां भेलौं स्वार्थी जे
एतना मं विफैर गेलियै॥ कोना बचवै …. कठिन अछि भेल जीवन अबकि ताकवै जे मरब हम तब
एहन निष्ठुर किये भेलियै
कोना आशुतोष कहाय गेलियै
दिगम्बर आय बोलावे गाय
जे भेल अपराध क्षमा करियै ॥ कोना बचवै

स्वर:~ हम भूल गए रे हर बात

बाबा ध्यान रखो मेरामहादेव हर हर शिव शंकर।
रखो पकड़के मेरा हाथ
महादेव हर हर शिव शंकर॥
मायामय दुनियां लुभावनी है
मोह जाल बड़ी ही लम्बी है।
करे तो करे क्या चंचल मन
भ्रमित होकर मंझधार बहा॥
उबारो भोलेदानी आप ॥
महादेव हर हर शिव शंकर…
कलयुग का जीव हूं मैं बाबा
साधन से अक्षम जो ठहरा।
यदि कृपा नहीं होगी तेरी
फिर तड़प ही जीवन में रहेगा॥
सम्हालो थाम कर मेरा हाथ ॥
महादेव हर हर शिव शंकर….

स्वरचित

स्वर :- ये दिल तुम बिन..

हो दुःख के दिन विकट फिर भीबोलो भोले बाबा की जय
वसर हो कितना भी कठिन
बोलो भोले बाबा की जय
हरेंगे सारे संकट को
बोलो भोले बाबा की जय
छटेंगे दुःख के बादल भी
बोलो भोले बाबा की जय ॥
वसर हो कितना भी कठिन . …..
हो दुःख के दिन विकट . …सुख दुःख के दिन बदलते हैंयूं रोना नहीं अच्छा
इक आते हैं जाते हैं
टिकना है नहीं अच्छा
सिखाते सब नए कुछ हैं
भूल जाना नहीं अच्छा
जली रहे आश की ज्योति
बोलो भोले बाबा की जय ॥
वसर हो कितना भी कठिन . …..
हो दुःख के दिन विकट . …दुःखों को मन में ही रखोभले कोई पूछ बैठे भी
हँसेगी दुनियां सुनकर के
देगी और ताने भी
करम के फल हैं होते सब
सुखों के साथ ही दुःख भी
हरेंगे हर सुदिन देकर
बोलो भोले बाबा की जय ॥
वसर हो कितना भी कठिन …..
हो दुःख के दिन विकट .…प्रसन्न होंगे तुरत आशुतोषकहती दुनियां जिनको है
मनोरथ पूर्ण होंगे सब
कठिन न कुछ भी उनको है
भजन कर मन से वो सुन लेगा
जो बहरा तो नहीं है
दिगम्बर नाथ सम्हालेगा
बोलो भोले बाबा की जय ॥
वसर हो कितना भी कठिन …..
हो दुःख के दिन विकट .…