भूमिका
श्रेणी: पार्थिवार्चा भूमिका कृते रत्नमयं लिंगं त्रेतायां हेमसंभवम् । द्वापरे पारदं श्रेष्ठं पार्थिवं तु कलौ युगे ॥ यथा सर्वेषु देवेषु ज्येष्ठः श्रेष्ठो महेश्वरः । एवं सर्वेषु लिंगेषु पार्थिवं श्रेष्ठमुच्यते ॥ हम जो भी शास्त्रोक्त कर्म करें वह यदि शास्त्रीय विधि से करें तभी सार्थक और फलदायक होता है, शास्त्रविधि का त्याग करके किया गया कर्म
