प्रतिनिधि
श्रेणी: निर्माण प्रतिनिधि प्रतिनिधित्व विषय में मुख्य विचारणीय तथ्य यह है कि पार्थिव निर्माण का जो वर्त्तमान व्यवहार है वो विकृत है। व्रत-जप-पूजनादि में स्वयं अक्षम हो तो अन्य को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है और प्रतिनिधित्व में सर्वोपरि स्थान ब्राह्मण का है। कारण कि “देवो भूत्वा देवं यजेत्”, यदि अन्यान्य को प्रतिनिधित्व प्रदान किया