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पार्थिव पूजनं – प्रतिनिधि
प्रतिनिधि प्रतिनिधित्व विषय में मुख्य विचारणीय तथ्य यह है कि पार्थिव निर्माण का जो वर्त्तमान व्यवहार है वो विकृत है। व्रत-जप-पूजनादि में स्वयं अक्षम हो तो अन्य को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है और प्रतिनिधित्व में सर्वोपरि स्थान ब्राह्मण का है। कारण कि “देवो भूत्वा देवं यजेत्”, यदि अन्यान्य को प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाय तो…
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पार्थिव पूजनं – मृदाहरण
बहुत लोगों के लिये ये आश्चर्य का विषय हो सकता है कि पार्थिव शिवलिंग निर्माण के लिये मिट्टी को लाने का भी विधान है। मिट्टी ही तो लाना है यह भाव त्याग करके यदि विधान को समझा जाय एवं पूरी प्रक्रिया विधिपूर्वक करी जाय तो अत्यधिक शुभफल की प्राप्ति संभव है। हम मृदाहरण के महत्वपूर्ण…
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पार्थिव पूजनं – निर्माण
निर्माण यहां हम केवल निर्माण विधि को समझने का प्रयास कर रहे हैं, इसका यह तात्पर्य ग्रहण नहीं करना चाहिये की सर्वप्रथम पार्थिव का निर्माण ही किया जायेगा। ये चर्चा पूजन प्रकरण में अनावश्यक विस्तार न हो मात्र इस विचार से प्रथम कर रहे हैं। मृदाहरणसंघट्टप्रतिष्ठाह्वानमेव च ।स्नपनं पूजनं चैव विसर्जनमतः परम् ॥हरो महेश्वरश्चैव शूलपाणिः…
