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  • पार्थिव पूजनं – पूजनारम्भ

    अब हम पूजा के दिन पूजन आरम्भ एवं अगले क्रम को भलीभांति समझने का प्रयास करेंगे, क्योंकि पूर्वोक्त अनुभागों में अनेकों वास्तविक तथ्य विदित तो हुये किन्तु सही क्रम स्पष्ट नहीं हुआ है और ये तब तक नहीं होगा जब-तक कि इसको पूर्णतः रेखांकित न किया जाय। एवं साथ ही एक समस्या यह भी उत्पन्न…

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  • पार्थिव पूजनं – आरती

    आरती तदनंतर आरती की थाली सजाकर कर्पूर, दीप आदि से आरती करे – ॐ अग्निर्देवता वातौ देवता सूर्यो देवता चन्द्रमा देवता वसवो देवता रुद्रा देवताऽऽदित्या देवता मरुतो देवता विश्वेदेवा देवता बृहस्पतिर्देवतेन्द्रो देवता वरुणो देवता ॥ ॐ कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥१॥ वन्दे देवमुमापति सुरगुरु वन्दे जगत्कारणंवन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं वन्दे…

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  • पार्थिव पूजनं – क्षमा प्रार्थना

    क्षमा प्रार्थना तावकस्त्वद्गुणप्राणस्त्वच्चित्तोऽहं सदा मृड । कृपानिधे इति ज्ञात्वा भूतनाथ प्रसीद मे ॥ अज्ञानाद्यदि वा ज्ञानाज्जप पूजादिकं मया । कृतं तदस्तु सफलं कृपया तव शंकर ॥ अहं पापी महानद्य पावनश्च भवान्महान् । इति विज्ञाय गौरीश यदिच्छसि तथा कुरु ॥ वेदैः पुराणैः सिद्धान्तैरृषिभिर्विविधैरपि । न ज्ञातोऽसि महादेव कुतोऽहं त्वं महाशिव ॥ यथा तथा त्वदीयोऽस्मि सर्वभावैर्महेश्वर ।…

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  • पार्थिव पूजनं – स्वस्तिवाचन

    स्वस्तिवाचन हरिः ॐ आ नो᳚ भ॒द्राः क्रत॑वो यन्तु वि॒श्वतोऽद॑ब्धासो॒ अप॑रीतासऽउ॒द्भिदः॑ । दे॒वा नो॒ यथा॒ सद॒मिद् वृ॒धे अस॒न्नप्रा᳚युवो रक्षि॒तारो᳚ दि॒वेदि॑वे ॥ दे॒वानां᳚म्भ॒द्रा सु॑म॒तिरृ॑जूय॒तां दे॒वानां᳚ ᳪ रा॒तिर॒भि नो॒ निव॑र्तताम् । दे॒वानां᳚ ᳪ स॒ख्यमुप॑ सेदिमा व॒यं दे॒वा न॒ आयुः॒ प्रति॑रन्तु जी॒वसे॑ ॥ तान्पूर्व॑या नि॒विदा᳚ हूमहे व॒यं भगं᳚म्मि॒त्रमदि॑तिं॒ दक्ष॑म॒स्रिधम्᳚ । अ॒र्य॒मणं॒ वरु॑णं॒ ᳪ सोम॑म॒श्विना॒ सर॑स्वती नः सु॒भगा॒ मय॑स्करत् ॥…

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  • पार्थिव पूजनं – प्रयोग

    पार्थिव पूजा अब पार्थिव पूजन से पूर्व निर्माण हेतु स्वयं के लिये भी और सभी ब्राह्मणों के लिये भी उचित स्थान पर आसन, मिट्टी (सम्यक रूप से गूंथी हुई), जलपात्र (प्रोक्षणी-पाद्य-अर्घ्य-आचमन-शुद्धोदक), पञ्चामृत, भस्म-चन्दन, रुद्राक्ष माला, दीप, अक्षत-पुष्पादि प्रस्तुत करें। पार्थिवलिंग के स्थापन व पूजन हेतु भी पीठ (चौकी) दे, चौकी पर सुंदर वस्त्र बिछा दे।…

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  • पार्थिव पूजनं – संकल्प

    संकल्प गणेशं च दिनेशं च वह्नि विष्णुं शिवं शिवाम् । संपूज्य देवषट्कं च सोऽधिकारी च पूजने ॥ गणेशं विघ्ननाशाय आरोग्याय दिवाकरम् । वह्निं शौचाय विष्णुं च लक्ष्म्यर्थं पूजयेन्नरः ॥ शिवं ज्ञानाय ज्ञानेशं शिवां च मुक्तिसिद्धये । संपूज्यैताँल्लभेत्प्राज्ञो विपरीतमतोऽन्यथा ॥ संकल्प का तात्पर्य केवल संकल्प नहीं है, संकल्प से पूर्व पवित्रीकरणादि सहित है। इसमें एक तथ्य…

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  • पार्थिव पूजनं – उत्तर पूजन

    उत्तर पूजन उत्तर पूजन का तात्पर्य रुद्राभिषेक के उपरांत की जाने वाली पुनः पूजा से है। यदि अभिषेक न किया गया हो तो उत्तर पूजन नहीं होगा और यदि पूजा के पश्चात् अभिषेक करते हैं तो उत्तर पूजा पुनः होगी। संभवतः आप यहां उत्तर पूजन विधि ढूंढने आये होंगे कि पार्थिवपूजन में उत्तरपूजन कैसे करें…

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  • पार्थिव पूजनं – विसर्जन

    विसर्जन अर्पण ॐ इतः पूर्वं प्राणबुद्धिदेहधर्माधिकारतो जाग्रत्स्वप्नसुषुप्त्यवस्थासु मनसा वाचा कर्मणा हस्ताभ्यां पद्भ्यामुदरेण शिश्ना यत्कृतं यदुक्तं तत्सर्वं ब्रह्मार्पणं भवतु ॥ भगवान के चरणों में अर्पण करे। विशेषार्घ्य ॐ साधु वाऽसाधु वा कर्म यद्यदाचरितं मया । तत्सर्वं कृपया देव गृहाणाराधनं मम ॥ पुष्पांजलि ॐ रश्मिरूपा महादेवा अत्र पूजितदेवताः । सदा शिवांगलीनास्ताः सन्ति सर्वाः सुखावहाः ॥ पार्थिव शिवलिंग…

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  • पार्थिव पूजनं – कलश स्थापन

    कलश स्थापन-पूजन तदनन्तर कलश स्थापन-पूजन करके नवग्रह-दशदिक्पालादि का पूजन करे। यहां पुनः ध्यातव्य है कि यदि हवन किया जायेगा तो नवग्रह मंडल ईशानकोण (वेदी से) में बनेगा और यदि हवन नहीं होगा तो कलश पर ही नवग्रह व दशदिक्पाल का आवाहन-पूजन किया जायेगा; विशेष चर्चा पूर्वकृत है। कलश स्थापना सामग्री कलश, पूर्णपात्र, नारियल, वस्त्र, चावल,…

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