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पार्थिव पूजनं – भूमिका
भूमिका कृते रत्नमयं लिंगं त्रेतायां हेमसंभवम् ।द्वापरे पारदं श्रेष्ठं पार्थिवं तु कलौ युगे ॥यथा सर्वेषु देवेषु ज्येष्ठः श्रेष्ठो महेश्वरः ।एवं सर्वेषु लिंगेषु पार्थिवं श्रेष्ठमुच्यते ॥ य: शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारत: ।न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम् ॥श्रीमद्भगवद्गीता/१६/२३ हम जो भी शास्त्रोक्त कर्म करें वह यदि शास्त्रीय विधि से करें तभी सार्थक और फलदायक होता…
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पार्थिव पूजनं – आरती हिन्दी
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव..ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।तीनों रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधर्ता।जगकर्ता जगहर्ता जगपालनकर्ता॥ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।प्रणवाक्षर के…
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पार्थिव पूजनं – प्रतिनिधि
प्रतिनिधि प्रतिनिधित्व विषय में मुख्य विचारणीय तथ्य यह है कि पार्थिव निर्माण का जो वर्त्तमान व्यवहार है वो विकृत है। व्रत-जप-पूजनादि में स्वयं अक्षम हो तो अन्य को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है और प्रतिनिधित्व में सर्वोपरि स्थान ब्राह्मण का है। कारण कि “देवो भूत्वा देवं यजेत्”, यदि अन्यान्य को प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाय तो…
