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    अनुप्रयोग सूची यहाँ पर संपूर्ण कर्मकांड विधि द्वारा प्रकाशित सभी अनुप्रयोगों (मोबाइल ऐप) की सूची दी गई है : 1. कालचक्रं (Kalchakram) – ज्योतिषीय अनुप्रयोग 2. पार्थिव पूजनं (Parthiv Pujanam) – भगवान शिव (पार्थिव) की शास्त्रीय पूजा विधि 3. सिद्धं सुसिद्धं श्राद्धं (Siddhamsusiddhamshradham) – संशोधित अपात्रक श्राद्ध विधि मिथिलादेशीय (खण्ड – १) अनुप्रयोग अद्यतन इन…

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  • पार्थिव पूजनं अनुप्रयोग

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  • पार्थिव पूजनं – अष्टकं

    ॥ रुद्राष्टक ॥ नमामीशमीशान निर्वाणरूपंविभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहंचिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥१॥निराकारमोंकारमूलं तुरीयंगिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।करालं महाकाल कालं कृपालंगुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥२॥तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरंमनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् ।स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गालसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥३॥चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालंप्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालंप्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥४॥प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशंअखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम् ।त्रयः शूल…

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  • पार्थिव पूजनं – पार्थिवार्चा

    नमः शिवाय मंत्रेणार्चनद्रव्यं च प्रोक्षयेत् ।भूरसीति च मंत्रेण क्षेत्रसिद्धिं प्रकारयेत् ॥आपोऽस्मानिति मंत्रेण जलसंस्कारमाचरेत् ।नमस्ते रुद्र मंत्रेण स्फाटिकाबंधमुच्यते ॥शंभवायेति मंत्रेण क्षेत्रशुद्धिं प्रकारयेत् ।नमः पूर्वेण कुर्यात्पंचामृतस्यापि प्रोक्षणम् ॥नीलग्रीवाय मंत्रेण नमः पूर्वेण भक्तिमान् ।चरेच्छंकरलिंगस्य प्रतिष्ठापनमुत्तमम् ॥भक्तितस्तत एतत्ते रुद्रायेति च मंत्रतः ।आसनं रमणीयं वै दद्याद्वैदिकमार्गकृत् ॥मानो महान्तमिति च मंत्रेणावाहनं चरेत् ।या ते रुद्रेण मंत्रेण संचरेदुपवेशनम् ॥मंत्रेण यामिषुमिति न्यासं कुर्य्याच्छिवस्य…

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  • पार्थिव पूजनं – आरती संस्कृत

    जय गंगाधर ॐ जय गंगाधर जय हर जय गिरिजाधीशा।त्वं मां पालय नित्यं कृपया जगदीशा॥ हर…॥कैलासे गिरिशिखरे कल्पद्रमविपिने।गुंजति मधुकरपुंजे कुंजवने गहने॥कोकिलकूजित खेलत हंसावन ललिता।रचयति कलाकलापं नृत्यति मुदसहिता ॥ हर…॥तस्मिंल्ललितसुदेशे शाला मणिरचिता।तन्मध्ये हरनिकटे गौरी मुदसहिता॥क्रीडा रचयति भूषारंचित निजमीशम्‌।इंद्रादिक सुर सेवत नामयते शीशम्‌ ॥ हर…॥बिबुधबधू बहु नृत्यत नामयते मुदसहिता।किन्नर गायन कुरुते सप्त स्वर सहिता॥धिनकत थै थै धिनकत मृदंग…

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  • रुद्राष्टाध्यायी

    अथ ध्यानम्  ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारु चन्द्रवतंसम् ।रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशु मृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम् ॥पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृतिं वसानम् ।विश्वाद्यं विश्ववन्द्यं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम् ॥ ॐ गणानां त्वा गणपति ᳪ हवामहे प्रियाणां त्वा प्रियपति ᳪ हवामहे निधीनां त्वा निधीपति ᳪ हवामहे वसो मम । आहमजानि गर्भधमात्त्वमजासि गर्भधम् ॥१॥  गायत्री त्रिष्टुब्जगत्यनुष्टुप्पङ्क्त्यासह ॥ बृहत्युष्णिहा ककुप्सूचीभिः शम्यन्तु त्वा ॥२॥ द्विपदा याश्चतुष्पदास्त्रिपदायाश्चषट्पदाः ।…

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  • पार्थिव पूजनं – सामग्री

    हम कोई भी पूजा अनुष्ठान करें उसमें सामग्री की भी आवश्यकता होती है जिनमें कुछ सामान्य सामग्री होती है जो सभी पूजा में सामान्य रूप से आवश्यक होते हैं एवं कुछ विशेष सामग्री होती है जो पूजा विशेष में ही प्रयोग किये जाते हैं। पार्थिव पूजन के लिये आवश्यक सामान्य व विशेष सामग्री दोनों की…

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  • पार्थिव पूजनं – कलश स्थापन

    कलश स्थापन-पूजन तदनन्तर कलश स्थापन-पूजन करके नवग्रह-दशदिक्पालादि का पूजन करे। यहां पुनः ध्यातव्य है कि यदि हवन किया जायेगा तो नवग्रह मंडल ईशानकोण (वेदी से) में बनेगा और यदि हवन नहीं होगा तो कलश पर ही नवग्रह व दशदिक्पाल का आवाहन-पूजन किया जायेगा; विशेष चर्चा पूर्वकृत है। कलश स्थापना सामग्री कलश, पूर्णपात्र, नारियल, वस्त्र, चावल,…

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  • पार्थिव पूजनं – हवन

    हवन का तात्पर्य विधिपूर्वक स्थापित अग्नि में सावधानी से उत्तम द्रव्यों की आहुति देना होता है न कि अलाव लगाना। प्रायः देखा यही जाता है कि अलाव लगाकर उसमें शाकल्यादि नामक द्रव्य देना मात्र ही हवन समझा जाता है जो की सर्वथा भ्रम है। यदि ठंड में ऐसे अलाव लगायें तो एक लाभ आग सेंकना…

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  • पार्थिव पूजनं – भजन विद्यापतिकृत

    विद्यापतिकृत आजु नाथ एक व्रत आजु नाथ एक व्रत महा सुख लागल हे।तोहे सिव धरु नट भेस कि डमरू बजाबह हे॥तोहे गौरी कहै छह नाचय हमें कोना नाचब हे॥चारि सोच मोहि होए कौन बिधि बाँचब हे॥अमिअ चुमिअ भूमि खसत बघम्बर जागत हे॥होएत बघम्बर बाघ बसहा धरि खायत हे॥सिरसँ ससरत साँप पुहुमि लोटायत हे॥कातिक पोसल मजूर…

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