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पार्थिव पूजनं – व्यवस्था
यदि हम विधि व्यवस्था कि बात करें तो यह सबसे महत्वपूर्ण भाग है और इस विषय को गंभीरता से समझना आवश्यक है। इस भाग में आने वाले अनेकों विषय को अलग से भी रखा गया है जैसे हवन, मंडल, पार्थिव निर्माण विधि आदि, इसलिये यहां उन विषयों के अतिरिक्त ही समझेंगे और अंत में वैदिकपूजापद्धति…
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पार्थिव पूजनं – निर्माण
निर्माण यहां हम केवल निर्माण विधि को समझने का प्रयास कर रहे हैं, इसका यह तात्पर्य ग्रहण नहीं करना चाहिये की सर्वप्रथम पार्थिव का निर्माण ही किया जायेगा। ये चर्चा पूजन प्रकरण में अनावश्यक विस्तार न हो मात्र इस विचार से प्रथम कर रहे हैं। मृदाहरणसंघट्टप्रतिष्ठाह्वानमेव च ।स्नपनं पूजनं चैव विसर्जनमतः परम् ॥हरो महेश्वरश्चैव शूलपाणिः…
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पार्थिव पूजनं – कवच
कवच ॥ शिवरहस्योक्त दधीचिकृत शिव कवच ॥ दधीचिरुवाचकवचं देवदेवस्य वक्ष्येशृणु नराधिप ।येनाऽऽवृतो महादुःखैर्मुक्तो मुक्ति च विन्दति ॥ध्येयः श्रीमन्महादेवः साम्बः संसारमोचकः ।पवित्रहृदयैः शुद्धैर्भस्मरुद्राक्षभूषणैः ॥श्रीविश्वेश्वर मुमासहायमनघं विश्वात्मकं चिद्घनम् ।सत्यं ज्ञानमनन्तमक्षरमजं निर्लिप्तमेकं प्रभुम् ॥ओङ्कारात्मकमक्षरं परतरं ब्रह्मादिभिर्भावितम् ।सानन्दं हृदि भावयेद्भवभयध्वान्तान्तमानन्ददम् ॥एवं ध्यात्वा महादेवं सच्चिदानन्दलक्षणम् ।कवचेनावृतो भूत्वा मृत्युपाशैर्विमुच्यते ॥यद्ब्रह्मरन्ध्रं मम संविदाभंतद्ब्रह्मरन्ध्रं भगवानुमेशः ।पायात्स संस्थानमनन्तलक्षणंनिवार्य सर्वाघकुलं निरन्तरम् ॥तत्पार्श्वर्घाग्निगमान्त चारीरुद्रः शिखायां तु…
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पार्थिव पूजनं – मंडल
मंडल विषयक चर्चा में एक तथ्य विशेष महत्वपूर्ण है कि यदि ५० – ६० वर्ष के वृद्ध से पूछें तो कहेंगे कि पहले एक भी मंडल नहीं बनता था और यदि नयी पीढ़ी से बात करें तो ज्ञात होगा कि जितने मंडल बनें उतनी विशेष पूजा। पार्थिव पूजन में मंडल विषयक चर्चा बहुत ही महत्वपूर्ण…
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पार्थिव पूजनं – मृदाहरण
बहुत लोगों के लिये ये आश्चर्य का विषय हो सकता है कि पार्थिव शिवलिंग निर्माण के लिये मिट्टी को लाने का भी विधान है। मिट्टी ही तो लाना है यह भाव त्याग करके यदि विधान को समझा जाय एवं पूरी प्रक्रिया विधिपूर्वक करी जाय तो अत्यधिक शुभफल की प्राप्ति संभव है। हम मृदाहरण के महत्वपूर्ण…
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पार्थिव पूजनं – भजन स्वरचित
संवारलौं सबके शिव शंकरसुख संपति सुहनमां ।बेर हमर आयल जं भोलामुनलौं आंखि धियनमां ॥भरलौं झोली सब के तॅ अहांऔढरदानी कहनमां।पापी एक टा हमही भारीमुनलौं आंखि धियनमां ॥रूसल छी किये दानी दिगम्बरगौरा के सजनमां ।पूजा करब जे आवू कनियेंबसहा के चढनमां ॥मंत्र कॅ ज्ञान न विधि-विधान तॅफेरब अहां जे मुंहमां।ताकथिन के फेर मूर्ख-जपाल केरखथिन अपन शरणमां…
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पार्थिव पूजनं – विसर्जन
विसर्जन अर्पण ॐ इतः पूर्वं प्राणबुद्धिदेहधर्माधिकारतो जाग्रत्स्वप्नसुषुप्त्यवस्थासु मनसा वाचा कर्मणा हस्ताभ्यां पद्भ्यामुदरेण शिश्ना यत्कृतं यदुक्तं तत्सर्वं ब्रह्मार्पणं भवतु ॥ भगवान के चरणों में अर्पण करे। विशेषार्घ्य ॐ साधु वाऽसाधु वा कर्म यद्यदाचरितं मया । तत्सर्वं कृपया देव गृहाणाराधनं मम ॥ पुष्पांजलि ॐ रश्मिरूपा महादेवा अत्र पूजितदेवताः । सदा शिवांगलीनास्ताः सन्ति सर्वाः सुखावहाः ॥ पार्थिव शिवलिंग…
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पार्थिव पूजनं – उत्तर पूजन
उत्तर पूजन उत्तर पूजन का तात्पर्य रुद्राभिषेक के उपरांत की जाने वाली पुनः पूजा से है। यदि अभिषेक न किया गया हो तो उत्तर पूजन नहीं होगा और यदि पूजा के पश्चात् अभिषेक करते हैं तो उत्तर पूजा पुनः होगी। संभवतः आप यहां उत्तर पूजन विधि ढूंढने आये होंगे कि पार्थिवपूजन में उत्तरपूजन कैसे करें…
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पार्थिव पूजनं – सहस्रनाम
रुद्र सहस्रनाम ॐ स्थिरः स्थाणुः प्रभुर्भानुः प्रवरो वरदो वरः ॥सर्वात्मा सर्वविख्यातः सर्वः सर्वकरो भवः ।जटी दण्डी शिखण्डी च सर्वगः सर्वभावनः ॥हरिश्च हरिणाक्षश्च सर्वभूतहरः स्मृतः ।प्रवृत्तिश्च निवृत्तिश्च शान्तात्मा शाश्वतो ध्रुवः ॥श्मशानवासी भगवान्खचरो गोचरोर्दनः ।अभिवाद्यो महाकर्मा तपस्वी भूतधारणः ॥उन्मत्तवेशः प्रच्छन्नः सर्वलोकप्रजापतिः ।महारूपो महाकायः सर्वरूपो महायशाः ॥महात्मा सर्वभूतश्च विरूपो वामनो नरः ।लोकपालोऽन्तर्हितात्मा प्रसादोऽभयदो विभुः ॥पवित्रश्च महांश्चैव नियतो नियताश्रयः…
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पार्थिव पूजनं – संकल्प
संकल्प गणेशं च दिनेशं च वह्नि विष्णुं शिवं शिवाम् । संपूज्य देवषट्कं च सोऽधिकारी च पूजने ॥ गणेशं विघ्ननाशाय आरोग्याय दिवाकरम् । वह्निं शौचाय विष्णुं च लक्ष्म्यर्थं पूजयेन्नरः ॥ शिवं ज्ञानाय ज्ञानेशं शिवां च मुक्तिसिद्धये । संपूज्यैताँल्लभेत्प्राज्ञो विपरीतमतोऽन्यथा ॥ संकल्प का तात्पर्य केवल संकल्प नहीं है, संकल्प से पूर्व पवित्रीकरणादि सहित है। इसमें एक तथ्य…
